झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें

असम में विधानसभा चुनाव का समर अब पूरी तरह से राजनीतिक अखड़ा बनता जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा को चुनौति देने के लिए विपक्षी एकता बिखतरी नजर आ रही है; कांग्रेस पर्टी को एनडीए की चुनौती का सामना करने के लिए इंडी गठबंधन का साथ नहीं मिल रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी अब ऐलान किया है कि वे असम चुनाव में अकेले ही लडे़गा।
झारखंड विधानसभा चुनाव में साथ चलने वाले इंडी गठबंधन के साथी अब असम के चुनावी मैदान में एक-दूसरे के सामने अपना-अपना उम्मीदवार उतारेंगे। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव के लिए 21 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है। हेमंत के इस फैसले ने कांग्रेस की उम्मीदों और चुनावी रणनीतियों पर पानी फेर दिया है, कांग्रेस ऐसा मानकर चल रही थी कि दोनों दल मिलकर भाजपा को मजबूत चुनौती देंगे।
असम कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उन्होंने गठबंधन को बचाए रखने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा को 57 सीटों का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन बातचीत का कोई सकारात्मक हल नहीं निकला। कांग्रेस को अब यह डर सता रहा है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से आदिवासी समुदायों और चाय बागान मजदूरों के वोट बंट जाएंगे, जिसका सीधा लाभ सत्ताधारी दल को मिल सकता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा अब अपनी पहचान झारखंड से बाहर भी मजबूत करना चाहती है। इसी उद्देश्य से पार्टी ने असम के विशिष्ट क्षेत्रों जैसे विश्वनाथ, चाबुआ और नाहरकटिया जैसी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। हालांकि दोनों ही दलों का प्राथमिक लक्ष्य विपक्षी मतों को एकजुट करना था, लेकिन इस ताजा घटनाक्रम ने असम की चुनावी जंग को त्रिकोणीय और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।





