विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, आरबीआई के ताजा आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को मिला संबल
विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, आरबीआई के ताजा आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को मिला संबल

विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, आरबीआई के ताजा आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को मिला संबल
विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी बढ़ोतरी
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हाल ही में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में यह 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले के सप्ताह में इसमें गिरावट देखी गई थी, जब यह 10.288 अरब डॉलर घटकर 688.058 अरब डॉलर रह गया था। इस ताजा उछाल ने बाजार में सकारात्मक संकेत दिए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार का बढ़ना किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि देश की बाहरी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है। लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद यह सुधार अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। आने वाले समय में इसका प्रभाव और स्पष्ट हो सकता है। यह बढ़ोतरी भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
फरवरी में बना था ऐतिहासिक रिकॉर्ड
इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उस समय वैश्विक परिस्थितियां अपेक्षाकृत स्थिर थीं और किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव का असर नहीं पड़ा था। हालांकि, इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हालात बदलने लगे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव देखने को मिला। यह गिरावट अचानक नहीं थी, बल्कि वैश्विक घटनाओं का असर धीरे-धीरे सामने आया। इसके बावजूद भारत ने अपने भंडार को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार का स्वाभाविक हिस्सा है। फिर भी फरवरी में बना यह रिकॉर्ड भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। यह उपलब्धि देश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी। इससे यह साबित होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। भविष्य में फिर से ऐसे स्तर तक पहुंचने की संभावना बनी हुई है।
वैश्विक तनाव का रुपये पर असर
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री कर रुपये को स्थिर करने की कोशिश की। इसके अलावा, कई अन्य उपाय भी किए गए ताकि मुद्रा बाजार में संतुलन बना रहे। इन प्रयासों का असर अब धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। हाल के सत्रों में रुपये में कुछ सुधार देखने को मिला है। यह संकेत देता है कि उठाए गए कदम प्रभावी साबित हो रहे हैं। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना अभी भी जरूरी है। बाजार की अस्थिरता किसी भी समय असर डाल सकती है। इसलिए सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।
विदेशी संपत्तियों और सोने में भी बढ़ोतरी
3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटकों में भी वृद्धि दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर हो गईं, जो कुल भंडार का बड़ा हिस्सा हैं। इन परिसंपत्तियों पर यूरो, पाउंड और येन जैसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही सोने के भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सोने का रिजर्व 7.2 अरब डॉलर बढ़कर 120.74 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की आरक्षित स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई है। इन सभी कारकों ने मिलकर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाने में योगदान दिया है। यह संकेत देता है कि भारत की आर्थिक नींव अभी भी मजबूत बनी हुई है।





