भानुप्रतापपुर ब्लॉक के इस…स्कूल के बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर,जनप्रतिनिधियों की दावों की खुली पोल ।
स्थानीय मुद्दों से भटके जनप्रतिनिधि, रेत खदानों पर टिकी नज़र ।

भानुप्रतापपुर/खिलेश्वर नेताम :- सरकार और जनप्रतिनिधियों द्वारा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है । जर्जर भवन में अपने भविष्य गढ़ रहे ननिहाल बच्चों की तस्वीरें उन सभी नेताओं,जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के मुंह पर तमाचा है जो मंचों में शिक्षा व्यवस्था पर बड़े – बड़े डींगे हांकते है। एक ओर भाजपा सरकार विश्व गुरु बनने की सपना देख रही वहीं दूसरी ओर तस्वीरें कुछ और ही बता रहीं है,मामला कांकेर जिला के ब्लॉक मुख्यालय भानुप्रतापपुर और मुख्य मार्ग से कुछ ही दूरी में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला भोंड़िया का है,जहां 2021 – 22 में बनी प्राथमिक शाला पूरा जर्जर हो गया है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि को खबर तक नहीं है,ऐसे में बच्चे अपने जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने पर मजबूर है । क्षेत्र में लगातार विकास होने की बात कही जाती है लेकिन सच्चाई तो यह है कि ये सिर्फ चुनावी ढकोसले हैं ।

खण्ड शिक्षा अधिकारी ने जर्जर भवन की जल्द मरम्मत करने की दी आश्वासन ।
इस मामला को लेकर टॉक इंडिया की टीम ने खण्ड शिक्षा अधिकारी से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के माध्यम से मुझे सूचना मिला है और इस भवन का मरम्मत का कार्य जल्द किया जाएगा ।
स्थानीय मुद्दों से भटके जनप्रतिनिधि, रेत खदानों पर टिकी नज़र ।
भानुप्रतापपुर क्षेत्र में इन दिनों जनप्रतिनिधियों का ध्यान स्थानीय समस्याओं से हटकर रेत खनन पर अधिक केंद्रित होता नजर आ रहा है। जहां एक ओर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग जूझ रहे है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि रेत खदानों को लेकर आपसी खींचतान और राजनीति में उलझे हुए हैं। रेत खदानों को लेकर जनप्रतिनिधि इतना मदहोश हैं कि स्थानीय समस्याओं पर कोई चर्चा तक नहीं कर रहे, कहीं पीने की पानी की समस्या है तो कहीं स्वास्थ्य सुविधा की लेकिन इन ज्वलंत मुद्दों पर कोई किसी की नजर नहीं है । अब यह देखने वाली बात है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस खबर के चलने के बाद कितना गंभीरता से संज्ञान में लेते है ।



