कांकेर जिले में गिरते जलस्तर के बावजूद बोर खनन जारी, आखिर बोर खनन पर कब लगेगा प्रतिबंध…?
डबल फसल से प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ रहा दबाव

कांकेर / खिलेश्वर नेताम :- जिले में लगातार गिरते जलस्तर के बावजूद बोर खनन पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगने से भूजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में बोरवेल खुदवा रहे हैं, जिससे जमीन के नीचे का पानी तेजी से कम हो रहा है। किसानों के द्वारा दुगना फसल लगाने के कारण धड़ल्ले से पूरा कांकेर जिला में बोर खनन का कार्य किया जा रहा है,जलस्तर कम होने के कारण अभी से ही नदी – नाला तालाब सूखने लग गए हैं।
जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में डबल फसल लेने की बढ़ती प्रवृत्ति भी जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बना रही है। अधिक सिंचाई की जरूरत के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिसका सीधा असर प्राकृतिक संतुलन पर पड़ रहा है।
पेयजल की बढ़ती समस्या
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए अभी से ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।
किसानों पर असर
पानी की कमी का सीधा असर खेती पर भी पड़ रहा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित हो रही है।
पशुओं के लिए भी संकट
गर्मी के मौसम में जलस्रोत सूखने से पशुओं के लिए भी पानी की समस्या बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बोर खनन पर नियंत्रण और जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसको लेकर जिला प्रशासन को ठोस कदम उठाने और किसानों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने की जरूरत है ।




