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‘मटका किंग’ रिव्यू: विजय वर्मा की दमदार परफॉर्मेंस के साथ लालच और सत्ता की दिलचस्प कहानी

‘मटका किंग’ रिव्यू: विजय वर्मा की दमदार परफॉर्मेंस के साथ लालच और सत्ता की दिलचस्प कहानी

मटका किंग में विजय वर्मा एक बार फिर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। इससे पहले ‘गुस्ताख इश्क’ में शायर की भूमिका निभाने के बाद, इस बार वे एक अलग अंदाज में नजर आते हैं। यह पीरियड क्राइम ड्रामा 1960 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है और एक ऐसे शख्स की कहानी दिखाता है, जो हालातों से लड़ते हुए सत्ता और पैसे की दुनिया में ऊपर उठता है। कहानी loosely तौर पर रतन खत्री जैसे किरदारों से प्रेरित है। सीरीज में लालच, ईमानदारी, रिश्तों और महत्वाकांक्षा के कई रंग देखने को मिलते हैं। आठ एपिसोड में फैली यह कहानी धीरे-धीरे अपने किरदारों की परतें खोलती है। यह सिर्फ जुए की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी स्वभाव का भी आईना है।

सीरीज की कहानी बृज भट्टी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे विजय वर्मा ने निभाया है। वह मुंबई की एक साधारण चाल में अपनी पत्नी बरखा और भाई लाछू के साथ रहता है। एक कॉटन मिल में काम करते हुए वह सट्टेबाजी के खेल से भी जुड़ा होता है। यहां लोग 0 से 9 तक के नंबरों पर दांव लगाते हैं और नतीजे न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से जुड़े होते हैं। लेकिन उसका बॉस लालजीभाई, जिसे गुलशन ग्रोवर ने निभाया है, बेईमानी से खेलता है। इसी धोखे और हालातों से परेशान होकर बृज अपना अलग रास्ता चुनता है। वह एक ऐसा ‘मटका’ खेल शुरू करता है, जो पूरी तरह ईमानदारी के सिद्धांत पर आधारित होता है।

कहानी में मोड़ तब आता है जब बृज का भाई जुए के कारण मुसीबत में फंस जाता है। उसे बचाने के लिए बृज को बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ता है। अपने बॉस से मदद न मिलने पर वह नौकरी छोड़ देता है और खुद का खेल शुरू करता है। यहीं से उसकी असली यात्रा शुरू होती है, जहां वह धीरे-धीरे ताकत और पैसे की दुनिया में बड़ा नाम बन जाता है। लेकिन सफलता के साथ उसकी जिंदगी भी बदलने लगती है। रिश्तों में दरार, भरोसे की कमी और लालच का असर साफ दिखने लगता है। यही संघर्ष इस कहानी को दिलचस्प बनाता है।

निर्देशन की बात करें तो नागराज मंजुले ने कहानी को प्रभावी तरीके से पेश किया है। ज्यादातर एपिसोड तेज गति से आगे बढ़ते हैं, हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी थोड़ी धीमी लगती है। एक्शन सीन काफी वास्तविक और प्रभावशाली हैं। संगीत भी सीरीज को मजबूत बनाता है, खासकर किशोर कुमार का गाना ‘जिंदगी एक सफर’ सही जगह इस्तेमाल किया गया है। तकनीकी तौर पर शो मजबूत है, हालांकि कुछ सीन में विजुअल्स थोड़े बनावटी लगते हैं। फिर भी कुल मिलाकर प्रोडक्शन क्वालिटी अच्छी कही जा सकती है।

एक्टिंग इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। विजय वर्मा ने बृज भट्टी के किरदार में गहराई और विविधता दिखाई है। उनके साथ कृतिका कामरा, सई ताम्हणकर, सिद्धार्थ जाधव और भूपेंद्र जादवत ने भी शानदार काम किया है। सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को मजबूती देती है। हालांकि कुछ किरदारों की गहराई और बेहतर हो सकती थी। कुल मिलाकर ‘मटका किंग’ एक ऐसी सीरीज है जो थ्रिल, ड्रामा और मजबूत अभिनय के कारण देखने लायक बनती है, खासकर उन दर्शकों के लिए जिन्हें क्राइम और इमोशनल कहानियां पसंद हैं।

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खिलेश्वर नेताम

मैं खिलेेश्वर नेताम, *Talk India Digital* का मुख्य संपादक हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। वर्षों से मैं निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर काम करता आ रहा हूं।

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