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सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर यूपी के इन 2 जिलों में बनेंगे 3 इंटरचेंज, 90 ब्रिज और अंडरपास

सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर यूपी के इन 2 जिलों में बनेंगे 3 इंटरचेंज, 90 ब्रिज और अंडरपास

सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर यूपी के इन 2 जिलों में बनेंगे 3 इंटरचेंज, 90 ब्रिज और अंडरपास

गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक बनने वाले प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को लेकर अब ढांचागत विकास की रूपरेखा लगभग तय कर ली गई है। National Highways Authority of India (एनएचएआई) इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसके तहत गोरखपुर और कुशीनगर जिले में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जाएंगे। इस एक्सप्रेसवे पर तीन बड़े इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जिससे यातायात को सुगम बनाया जा सके। इसके अलावा करीब 90 ब्रिज और अंडरपास का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय कनेक्टिविटी और सड़क सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। खास बात यह है कि कुशीनगर के कसया क्षेत्र में दो बड़े पुल बनाए जाएंगे, जो इस प्रोजेक्ट के अहम हिस्सों में शामिल हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई गोरखपुर से बिहार सीमा तक करीब 86.6 किलोमीटर तय की गई है, जो Gorakhpur से शुरू होकर Kushinagar होते हुए आगे बढ़ेगा। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत अंतिम 3D सर्वे शुरू हो चुका है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि किन-किन क्षेत्रों की कितनी जमीन इस परियोजना में शामिल होगी। इसी सर्वे के दौरान यह भी तय किया जा रहा है कि किस गांव या स्थान पर ब्रिज और अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेसवे की शुरुआत जंगल कौड़िया-कालेसर फोरलेन के पास नैयापार खुर्द से होगी, जहां एक इंटरचेंज बनाया जाएगा। इसके अलावा एनएच-727 पर दीगहा बुजुर्ग और एनएच-730 पर तमकुहीराज में भी इंटरचेंज की योजना है, जिससे अलग-अलग मार्गों से जुड़ाव बेहतर होगा।

कुशीनगर के कसया इलाके में बनने वाले दो प्रमुख पुल इस परियोजना की खास विशेषता होंगे, जिनमें एक की लंबाई 120 मीटर और दूसरे की 70 मीटर होगी। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे पर छोटे-बड़े कई ढांचागत निर्माण भी किए जाएंगे। योजना के अनुसार 60 मीटर से कम स्पैन वाले 38 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे। वहीं, 35 छोटे अंडरपास (एसवीयूपी) होंगे, जिनकी चौड़ाई लगभग 7 मीटर और ऊंचाई 4.5 मीटर रखी जाएगी। इसके अलावा 12 मीटर चौड़े और 4.5 मीटर ऊंचे 6 एलवीयूपी अंडरपास तथा 20 मीटर चौड़े और 5.5 मीटर ऊंचे 9 वीवीयूपी अंडरपास भी बनाए जाएंगे। इन सभी संरचनाओं का उद्देश्य स्थानीय लोगों की आवाजाही को आसान बनाना और हाईवे पर ट्रैफिक को बाधित होने से बचाना है।

इस परियोजना को लेकर अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने वाली एजेंसी ने इंटरचेंज, ब्रिज और अंडरपास के स्थान पहले ही प्रस्तावित कर दिए हैं, जिनमें अब बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ललित प्रताप पाल के अनुसार जमीन अधिग्रहण के लिए अंतिम सर्वे का काम तेजी से चल रहा है और इसके पूरा होते ही आगे की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। यह एक्सप्रेसवे न केवल गोरखपुर और कुशीनगर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी देगा, बल्कि भविष्य में आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। खासतौर पर कुशीनगर एयरपोर्ट के पास बनाए जाने वाले इंटरचेंज से हवाई यात्रा और सड़क मार्ग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

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खिलेश्वर नेताम

मैं खिलेेश्वर नेताम, *Talk India Digital* का मुख्य संपादक हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। वर्षों से मैं निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर काम करता आ रहा हूं।

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