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लेंसकार्ट विवाद और शेयरों में गिरावट: ड्रेस कोड मुद्दे का बाजार पर असर

लेंसकार्ट विवाद और शेयरों में गिरावट: ड्रेस कोड मुद्दे का बाजार पर असर

लेंसकार्ट विवाद और शेयरों में गिरावट: ड्रेस कोड मुद्दे का बाजार पर असर

लेंसकार्ट के शेयर आज कारोबार के दौरान दबाव में दिखाई दिए और करीब चार फीसदी तक गिर गए, जबकि व्यापक बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ था। पिछले सत्र में कंपनी का शेयर 534.85 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन आज यह गिरावट के साथ 530.05 रुपये पर खुला। दिन के दौरान इसमें और कमजोरी आई और यह लगभग 508.70 रुपये तक फिसल गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब हाल ही में कंपनी ने 559.80 रुपये का ऑल-टाइम हाई छुआ था। उस उच्च स्तर से अब तक शेयर में सात फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इस गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैप पर भी पड़ा है। अब इसका बाजार पूंजीकरण 90 हजार करोड़ रुपये से नीचे आ गया है।

लेंसकार्ट का आईपीओ पिछले साल काफी चर्चा में रहा था और इसे निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी। यह इश्यू 31 अक्टूबर को खुला था और 4 नवंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहा। कंपनी ने इसका इश्यू प्राइस 402 रुपये प्रति शेयर तय किया था। निवेशकों ने इसमें जबरदस्त रुचि दिखाई और यह 28.26 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद कंपनी की लिस्टिंग 10 नवंबर को बीएसई और एनएसई पर हुई। लिस्टिंग के बाद से शेयर में अच्छी तेजी देखी गई थी। इस साल अब तक इसमें 17.58 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। वहीं पिछले छह महीनों में यह करीब 27.91 फीसदी चढ़ चुका है।

इस बीच कंपनी एक विवाद को लेकर भी सुर्खियों में रही है, जिसने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। सोशल मीडिया पर एक कथित आंतरिक ग्रूमिंग दस्तावेज वायरल हुआ था। इस दस्तावेज में दावा किया गया था कि कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति नहीं है। इस पर लोगों ने नाराजगी जताई और कंपनी के खिलाफ प्रतिक्रिया शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने तो बहिष्कार की मांग भी कर डाली। बढ़ते विरोध को देखते हुए कंपनी को सफाई देनी पड़ी। यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने आधिकारिक तौर पर माफी जारी की और अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि वायरल दस्तावेज पुराना था और वर्तमान नीति को दर्शाता नहीं है। साथ ही एक नया ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ भी जारी किया गया। इस नई नीति में कर्मचारियों को धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई है। इसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों को स्वीकार किया गया है। कंपनी ने कहा कि वह अपने दिशानिर्देशों को पारदर्शी बनाना चाहती है। इसका उद्देश्य ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर करना है।

कंपनी के संस्थापक ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी और स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति में किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को गलतफहमी का परिणाम बताया। कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि किसी को ठेस पहुंची है तो उसे इसका खेद है। लेंसकार्ट ने जोर देकर कहा कि विविधता और आस्था का सम्मान उसकी पहचान का हिस्सा है। देशभर में उसके 2,400 से अधिक स्टोर हैं जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं। कंपनी का कहना है कि वह सभी कर्मचारियों के विश्वास और परंपराओं का सम्मान करती है।

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खिलेश्वर नेताम

मैं खिलेेश्वर नेताम, *Talk India Digital* का मुख्य संपादक हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। वर्षों से मैं निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर काम करता आ रहा हूं।

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