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क्या बुढ़ापे में अकेलापन सच में तेजी से कमजोर करता है याददाश्त? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

क्या बुढ़ापे में अकेलापन सच में तेजी से कमजोर करता है याददाश्त? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

क्या बुढ़ापे में अकेलापन सच में तेजी से कमजोर करता है याददाश्त? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली। आम धारणा है कि बुढ़ापे में अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य को तेजी से खराब करता है, लेकिन हालिया शोध ने इस सोच को आंशिक रूप से गलत बताया है। अध्ययन के मुताबिक, अकेलापन शुरुआत में याददाश्त को थोड़ा कमजोर कर सकता है, पर यह मानसिक गिरावट की रफ्तार को तेज नहीं करता।

Aging & Mental Health में प्रकाशित इस शोध में करीब 10,000 यूरोपीय बुजुर्गों को शामिल किया गया। 65 से 94 वर्ष की उम्र के इन प्रतिभागियों के डेटा को 2012 से 2019 तक ट्रैक किया गया। सात साल तक वैज्ञानिकों ने उनकी याददाश्त और मानसिक स्थिति का विश्लेषण किया।

शोध में पाया गया कि जो बुजुर्ग ज्यादा अकेलापन महसूस करते थे, उनकी याददाश्त शुरुआत में कमजोर थी। लेकिन समय के साथ उनकी मानसिक गिरावट की गति सामान्य लोगों जैसी ही रही। यानी तीसरे से सातवें साल के बीच कोई असामान्य गिरावट नहीं दिखी।

आंकड़ों के अनुसार, 92 प्रतिशत लोगों ने सामान्य या कम अकेलापन महसूस किया, जबकि 8 प्रतिशत लोग गहरे अकेलेपन से जूझ रहे थे। इस समूह में अधिक उम्र, महिलाओं की संख्या ज्यादा और पहले से स्वास्थ्य समस्याएं जैसे डिप्रेशन, हाई बीपी और डायबिटीज देखी गईं।

अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि अकेलापन और याददाश्त के बीच संबंध उतना सीधा नहीं है जितना पहले माना जाता था। अकेलापन शुरुआती असर डाल सकता है, लेकिन यह डिमेंशिया या तेज मानसिक गिरावट की मुख्य वजह नहीं बनता।

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खिलेश्वर नेताम

मैं खिलेेश्वर नेताम, *Talk India Digital* का मुख्य संपादक हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। वर्षों से मैं निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर काम करता आ रहा हूं।

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