कोरर में MBBS डॉक्टर के लिए आबंटित आवास पर स्टाफ नर्स का कब्जा, 1 वर्ष पूर्व निर्देश के बाद भी नहीं हुआ खाली…!
चिकित्सा अधिकारी के रहने की व्यवस्था नहीं होने से सीधा स्वास्थ्य सेवाएं पर पड़ रहा असर ।

भानुप्रतापपुर / खिलेश्वर नेताम :- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोरर में पदस्थ MBBS डॉक्टर के लिए आवास उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि डॉक्टर के लिए निर्धारित शासकीय आवास में एक स्टाफ नर्स ने पिछले कुछ सालों से निवास कर रही है , जिसके कारण चिकित्सक को आवास नहीं मिल पा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
MBBS डॉक्टर को आबंटित शासकीय आवास में कब्जा करने वाली स्टाफ नर्स को मिली आदेश पत्र के अनुसार, खंड चिकित्सा अधिकारी, भानुप्रतापपुर ने 25 अगस्त 2025 को नर्स राखी पाईक को आदेश जारी कर तीन दिनों के भीतर शासकीय आवास खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज दिनांक तक नर्स ने आदेश को दरकिनार कर खाली नहीं किया और न ही बिजली का बिल भुगतान किया है…।

आदेश में उल्लेख है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोरर में अनुबंध MBBS चिकित्सक की नियुक्ति होने के कारण उक्त शासकीय आवास उन्हें आवंटित किया जाना है। वर्तमान में जिस आवास में स्टाफ नर्स निवासरत हैं, वह चिकित्सक के लिए निर्धारित आवास बताया जा रहा है।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पत्र प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर आवास खाली कर कार्यालय को सूचित किया जाए। इस आदेश की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कांकेर को भी प्रेषित की गई है, जिसके बावजूद भी स्टाफ नर्स के अड़ियल रवैए के चलते आवास रिक्त नहीं की गई है ।
चिकित्सा अधिकारी के नहीं रुकने से होती है मरीजों को परेशानी ।
स्थानीय लोगों ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि चिकित्सा अधिकारी के लिए सरकारी आवास आबंटन नहीं होने के कारण शाम होते ही अपने निवासरत स्थान कांकेर चले जाते है जिससे स्थानीय लोगों की आपातकालीन स्थिति में काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है,ऐसे में यदि नियुक्त चिकित्सक को रहने के लिए सरकारी आवास समय पर उपलब्ध नहीं होगा, तो इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। इस मामला को लेकर लोगों ने मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द चिकित्सा अधिकारी के लिए आवास की व्यवस्था की जाए ताकि आपातकालीन स्थिति में भी लोगों को बेहतर इलाज मिल सके ।
अब सवाल यह है कि खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला चिकित्सा अधिकारी को इसकी जानकारी होने के बाद भी संबंधित नर्स के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है… अब देखन होगा खबर चलने के बाद नर्स के ऊपर क्या कार्यवाही की जाती है !





