पर्यावरण प्रदूषण और अनियमितताओं पर भड़के ग्रामीण, गोदावरी इस्पात के खिलाफ खोला मोर्चा जांच के लिए सांसद को सौंपा ज्ञापन ।
अवैध जंगल कटाई की जांच व स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की उठी मांग ।

भानुप्रतापपुर / खिलेश्वर नेताम:- क्षेत्र में संचालित गोदावरी इस्पात आरीडोंगरी, कच्चे द्वारा की जा रही भारी अनियमितताओं, बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और स्थानीय हितों की अनदेखी के खिलाफ ‘स्थानीय लोकाधिकार समिति’ के नेतृत्व में नागरिकों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। समिति ने क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को लेकर क्षेत्र के यशस्वी लोकसभा सांसद माननीय श्री भोजराज नाग को एक शिकायती सह मांग पत्र सौंपकर तत्काल उचित दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गोदावरी इस्पात प्रबंधन द्वारा पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खदान से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल (डस्ट) को खुले में डाला जा रहा है, जिससे परिवहन के दौरान और खदान के आसपास के क्षेत्रों में भारी प्रदूषण फैल रहा है। इस उड़ती धूल के कारण क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियों का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। साथ ही, बस्तर और कांकेर क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन और समग्र पर्यावरण पर इसका बेहद विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने विशेष रूप से आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गोदावरी माइंस द्वारा वेस्ट डंप (कचरा फेंकने) के लिए जो जमीन लीज पर ली गई है, उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। प्रबंधन ने लीज की आड़ में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर दी है। ग्रामीणों की मांग है कि इस लीज को रद्द किया जाए और जिन पेड़ों को काटा गया है, उनके स्थान पर दोबारा सघन वृक्षारोपण (पेड़ों को दोबारा गाड़ना) सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त, सीएसआर और डीएमएफ फंड में भी भारी घोटाले की आशंका जताई गई है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
लोकाधिकार समिति द्वारा सांसद के समक्ष रखी गई मुख्य मांगें
1. वेस्ट डंप लीज पर रोक व पुनर्वनीकरण: गोदावरी माइंस द्वारा वेस्ट डंप के लिए ली गई जमीन की लीज पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा काटे गए पेड़ों की जगह अनिवार्य रूप से दोबारा नए पेड़ लगाए जाएं।
2. स्थानीय रोजगार की अनिवार्य व्यवस्था: खदान प्रभावित क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत से गोदावरी इस्पात द्वारा कम से कम 150 स्थानीय बेरोजगार युवाओं और नागरिकों को अनिवार्य रूप से रोजगार प्रदान किया जावे।
3. सीएसआर एवं डीएमएफ फंड से क्षेत्र का विकास: प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक ग्राम पंचायत को बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए सीएसआर और डीएमएफ फंड से आवश्यक राशि आवंटित की जाए।
4.फंड की भौतिक जांच व ऑडिट: गोदावरी इस्पात आरीडोंगरी में सीएसआर फंड के तहत कागजों पर दिखाए गए समस्त कार्यों का भौतिक व आकस्मिक ऑडिट कराया जावे और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
5. प्रभावित पंचायतों की सूची सार्वजनिक हो: खदान के प्रभाव क्षेत्र यानी 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के नामों की सूची को सार्वजनिक किया जावे।
6. अवैध जंगल कटाई की सूक्ष्म जांच: प्रबंधन द्वारा अब तक की गई अवैध जंगल कटाई की सूक्ष्म जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जावे।
स्थानीय लोकाधिकार समिति ने माननीय सांसद से मांग किया है कि वे बस्तर एवं कांकेर क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए तथा स्थानीय ग्रामीणों के अधिकारों व रोजगार को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर शिकायत पर तत्काल संज्ञान लें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों को उचित कार्रवाई हेतु निर्देशित नहीं किया गया, तो क्षेत्र की जनता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे: मांग पत्र सौंपने और विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रमुख रूप से चंद्रमौलि मिश्रा, हरेश चक्रधारी, रमल कोर्राम, संजू नेताम सहित स्थानीय लोकाधिकार समिति के अनेक पदाधिकारी, सदस्यगण और भारी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण व नागरिक उपस्थित थे।





