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SDOP के समर्थन में एकजुट हुआ सर्व समाज, पुतला दहन पर भड़का आक्रोश,समाज ने की शिकायत दर्ज।

इस विरोध का विधायक को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है खामियाजा ।

भानुप्रतापपुर :- भानुप्रतापपुर क्षेत्र में जब से रेत खनन का कार्य शुरू हुआ है तब से कुछ न कुछ नया विवाद खड़े होते नजर आ रहा है,पिछले महीने 16 / 03/2026 को विधानसभा में क्षेत्रीय विधायक सावित्री मंडावी ने आवाज उठाई थी, जिस पर तहसीलदार के कार्यवाही के बाद रेत माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है,कार्यवाही के बाद से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने लगातार लगातार विरोध भी जताया । मामला तब गंभीर हुआ जब अनुविभागीय अधिकारी शेर बहादुर सिंह ठाकुर के खिलाफ रेत तस्करी में मिलीभगत के आरोप लगाकर पुतला दहन कर दिया अब मामला ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर जहाँ कुछ ग्रामीणों ने SDOP पर रेत तस्करी में मिलीभगत का आरोप लगाए थे, वहीं अब क्षेत्र का सर्व समाज और आदिवासी समाज उनके समर्थन में खड़ा हो गया है ।

राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन सौंपने आए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने sdop के खिलाफ हुए पुतला दहन के विषय में बताते हुए कहा कि sdop आदिवासी समुदाय से आते हैं इसीलिए माफियाओं के द्वारा दबाव बनाकर कर एक आदिवासी अधिकारी के ऊपर बिना तथ्यों के आरोप लगा रहे हैं । समाज के प्रतिनिधियों ने तहसील कार्यालय पहुँचकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें SDOP शेर बहादुर सिंह का पुतला दहन करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सर्व आदिवासी समाज ने दी चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के दौरान आदिवासी नेता ज्ञान सिंह गौर और सरपंच अनीता रावटे ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यदि पुतला दहन करने वालों और झूठे आरोप लगाने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

इस विरोध का विधायक को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है खामियाजा । 

भानुप्रतापपुर क्षेत्र में हाल ही में हुए विवाद के बाद स्थानीय विधायक की चुप्पी अब चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर पूरे मामले को लेकर सर्व समाज खुलकर सामने आया और अपनी प्रतिक्रिया दी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के विधायक ने अब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक की जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट करें। लेकिन लगातार बढ़ते विवाद के बावजूद उनकी खामोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि जब क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, तब जनप्रतिनिधि का मौन रहना उचित नहीं है। इससे न केवल जनता में असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। हालांकि, विधायक की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस मुद्दे पर जल्द ही उनकी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, लेकिन तब तक उनकी चुप्पी को लेकर चर्चाओं का दौर जारी रहेगा।

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खिलेश्वर नेताम

मैं खिलेेश्वर नेताम, *Talk India Digital* का मुख्य संपादक हूं। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। वर्षों से मैं निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के सिद्धांतों पर काम करता आ रहा हूं।

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