ग्राम घोटिया में तालाब गहरीकरण के नाम से भ्रष्टाचार की आशंका, सचिव और रोजगार सहायक की कार्यप्रणाली संदेहास्पद…जांच की मांग !
गहरीकरण के लिए 4 लाख से अधिक की राशि स्वीकृत, लेकिन जमीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्य ।

भानुप्रतापपुर/ खिलेश्वर नेताम:- ग्राम पंचायत घोटिया में तालाब गहरीकरण कार्य में भारी मात्रा में भ्रष्टाचार की आशंका स्थानीय ग्रामीणों ने जताई है। यह मामला भानुप्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत घोटिया के आश्रित ग्राम बागवाही का है जहां तालाब गहरीकरण के नाम से आये लाखों रुपए की राशियो का पंचायत के कर्मचारियों ने मिलकर बंदरबांट कर दिया है, सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ( RTI ACT) के तहत् मिली जानकारी के अनुसार तालाब गहरीकरण कार्य के नाम से 4.950 लाख रूपए की राशि स्वीकृत हुआ था, लेकिन मौके पर हुए कार्य को देखकर ऐसा प्रतीत होता कि मुश्किल से 2 लाख रूपए खर्च नहीं हुई होगी । यह आप इस तस्वीर को देखकर समझ सकते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में गहरीकरण का कार्य नाम मात्र का किया गया है, जबकि सरकारी अभिलेखों में बड़ी राशि खर्च होना दर्शाया जा सकता है,लेकिन तालाब के पास बने बोर्ड में अभी तक सूचना तक नहीं दर्शाया गया है इससे स्पष्ट रूप से पंचायत के कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सचिव बसंती नेताम ने दी प्रतिक्रिया
ग्राम सचिव बसंती नेताम ने सूचना के अधिकार के तहत् जानकारी देते हुए कहा कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है इस विषय में रोजगार सहायक राजकुमार दर्रो ज्यादा अच्छा से बता पाएंगे,अब आप बताईये पंचायत का अधिकारी सचिव होता है लेकिन सचिव मैडम को इसको जानकारी नहीं है, ऐसे में सचिव जी का मिलीभगत होना संदेहास्पद है।
स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि कार्य में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आगे ग्रामीणों ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत राशि का सही उपयोग होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच सके।
अब देखना होगा कि इस मामला में संलिप्त और संबंधित लोगों के ऊपर क्या कार्यवाही होती है ।





